उत्तराखंड की युवती निकली बुल्ली बाई एप की मास्टरमाइंड, इंजीनीयर का छात्र भी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस टीम ने बुल्ली बाई एप पर मुस्लिम महिलाओं को नीलामी के नाम पर अपमानित करने के मामले में एक युवती को उत्तराखंड के रुद्रपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसे जिला कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए पेश किया। इसके बाद पुलिस युवती को रिमांड पर लेकर मुंबई चली गई। इससे पूर्व इसी मामले में पुलिस ने बंगलुरु में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस इस मामले में महाराष्ट्र और दिल्ली में अज्ञात अारोपितों के खिलाफ आइटीसी व आइटी एक्ट में केस दर्ज किया है।

एक साल पहले सुल्ली डील्स एप बनाकर महिलाओं को नीलामी के नाम पर अपमानित किया जा रहा था। जब यह मामला पुलिस के पास पहुंचा तो जांच शुरु हुई। मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। इसकी भनक लगते ही आरोपितों ने बुल्ली बाई एप बनाया और एक आरोपित एक आपत्तिजनक ट्विटर हैंडल चलाकर कंटेंट अपलोड कर रहा था। इसके लिए अमेरिका के सेंस फ्रांसिसको के गिट हब प्लेटफार्म के जरिये मुस्लिम महिलाओं को नीलामी करने की लिस्ट किया। तस्वीरों को बिना अनुमति से लिया गया था और उनसे छेड़छाड़ की गई थी। एक महिला पत्रकार ने बुल्ली बाई एप पर डील आफ द डे बताकर बेची जा रही अपनी तस्वीर को शेयर किया। साथ ही ट़्विटर के जरिये दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर पुलिस जांच में जुट गई थी।

दरअसल, तीन जनवरी सोमवार को बंगलुरु से विशाल सिंह 21, पेशे से इंजीनियर को इस एप के मामले में गिरफ्तार किया। विशाल से पूछताछ में एक युवती के रुद्रपुर के होने की जानकारी मिली। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस रुद्रपुर कोतवाली पहुंची। मुंबई पुलिस ने आदर्श कॉलोनी श्वेता सिंह पुत्री अनंतपाल को गिरफ्तार किया। इस दौरान उसने पुलिस को बुल्ली एप में संलिप्तता की बात कबूल की। साथ ही पुलिस ने उससे दो मोबाइल भी बरामद किए। बाद में पुलिस उसे जिला कोर्ट में पेश किया। जहां पर कोर्ट ने रिमांड दे दी है। बताया जा रहा है कि युवती बुली बाई एप में मुख्य आरोपित है। सीओ सिटी अभय सिंह ने बताया कि युवती से पूछताछ कर कुछ अन्य जानकारी जुटाई जा रही है।

पिछले दिनों से इस एप की चर्चा खूब हो रही है। यह गिटहब नाम के प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। इस पर समुदाय विशेष की महिलाओं की बोली लगाई जा रही थी। इसमें महिलाओं का चेहरा नजर आता है, जिसे बुली बाई नाम दिया गया। इसमें उन महिलाओं को टारगेट किया जाता है जो इंटरनेट मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। इन समुदाय विशेष की महिलाओं की तस्वीरों को प्राइसटैग के साथ एप में लोग एकदूसरे को साझा करते थे। इसके अलावा शातिर तरीके से इसे ट्वीटर पर भी प्रमोट किया जा रहा था। केंद्र सरकार के कहने पर इसे हटा दिया गया है।

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