निष्कासन से भड़के अकील अहमद, कहा-उत्तराखंड में अब तो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनकर रहेगी, चाहे चंदा जमा करना पड़े

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हार मिलने के बाद अब उत्तराखंड कांग्रेस उपाध्यक्ष अकील अहमद पर कार्रवाई की गई है। कांग्रेस पार्टी से उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। बता दें कि चुनाव से पहले और बाद में अकील अहमद ने मीडिया में लगातार मुस्लिम यूनिवर्सिटी का मु्द्दा उठाकर अनगर्ल बयानबाजी की जिसके चलते उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. बता दें कि इस मुद्दे को लेकर हरीश रावत भड़क गए थे और उन्होंने कहा था कि उन्होंने ऐसी कोई मांग स्वीकार नहीं की।

वहीं अब अकील अहमद अपने निष्कासन से भड़क गए हैं और उन्हें कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा साथ ही हरीश रावत पर भी. अकील अहमद ने कहा कि उत्तराखंड में अब तो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनकर रहेगी। चाहे इसके लिए समाज के लोगों से चंदा इकट्ठा करना पड़े। बगावती तेवर दिखाते हुए उन्होंने कहा कि वह इसी मुद्दे पर हरिद्वार लोकसभा से टिकट की मांग करेंगे। पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। अकील ने हरीश रावत के उस आरोप का भी जवाब दिया है जिसमें उन्होंने कुछ लोगों पर उनकी बेटी को हराने का काम करने का आरोप लगाया है। अकील ने कहा कि उन्हें हरीश रावत की बेटी को हराने नहीं जिताने का काम किया। उन्होंने कहा कि 2017 के चुनाव में तो उन्होंने कोई बयान नहीं दिया था, तब कांग्रेस क्यों हारी? तत्कालीन मुख्यमंत्री दो-दो सीटों से पराजित कैसे हो गए?

अकील अहमद ने कहा कि कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा मुझे पर फोड़ रही है। मेरी मांग एक सामान्य मांग की तरह थी लेकिन भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया और वोटों का ध्रुवीकरण किया। कहा कि इस मामले में हरीश रावत से कोई बात नहीं हुई थी. कहा कि इस मुद्दे के कारण कांग्रेस नहीं हारी। बड़े नेता अपनी कमियां छुपाने के लिए हार का ठीकरा उनके सिर फोड़ रहे हैं। वे मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की अपनी मांग पर अब भी कायम हैं और इसी मुद्दे के साथ लोकसभा चुनाव में हरिद्वार से टिकट मांगेंगे। यदि पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय मैदान में उतरेंगे। 

अकील ने कहा कि उन्होंने हरीश रावत के उन आरोपों को भी नकारा, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें उनकी बेटी को हराने के लिए हरिद्वार भेजा था। अकील ने कहा कि उन्होंने उनकी बेटी को हराने नहीं, बल्कि जिताने का काम किया है। जो हरीश रावत आज कह रहे हैं कि वह अकील अहमद को जानते भी नहीं हैं, जबकि उन्होंने खुद वर्ष 2016 में उन्हें दर्जाधारी मंत्री बनाया था। अकील ने कहा कि वह चुनाव में सहसपुर विधानसभा क्षेेत्र से टिकट मांग रहे थे। टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय पर्चा भर दिया। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश जोशी उन्हें मनाने आए थे। तब उन्होंने क्षेत्र से जुड़ी दस मांगों का मांगपत्र पार्टी नेताओं को सौंपा था। इसमें एक मांग मुस्लिम यूनिवर्सिटी की भी थी। तब उनसे कहा गया था कि संगठन में पद और सरकार बनने पर उचित सम्मान दिया जाएगा.

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