खबर देव रिपोर्ट कालू वर्मा राष्ट्रपति पदक की फाइल में देरी पर वरिष्ठ पत्रकार ने किया खुलासा,गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाया सवाल, जांच की मांग।
हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रपति और गृहमंत्री पदक दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर वरिष्ठ पत्रकार अजीत सिंह राठी ने अपने X अकाउंट पर एक पोस्ट कर गंभीर सवाल खडे किए हैं।साथ ही उन्होंने गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
अजीत सिंह राठी ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पदक नहीं मिलने का ठीकरा पुलिस मुख्यालय पर फोड़ा गया, जबकि इसके लिए गृह विभाग की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने गृह सचिव शैलेश बगोली से सवाल किया कि जिन पुलिसकर्मियों के नाम राष्ट्रपति और गृहमंत्री पदक के लिए प्रस्तावित थे, उनकी फाइल की मंजूरी में 27 दिन क्यों लगे।
पोस्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने कुछ तारीख का जिक्र किया जिसके अनुसार 24 जून को पुलिस मुख्यालय ने पदक के लिए प्रस्तावित नामों की फाइल स्वीकृति के लिए गृह विभाग को भेजी थी। इसके बाद 21 जुलाई को शासन से स्वीकृति मिलने के बाद फाइल वापस पुलिस मुख्यालय भेजे जाने का दावा किया गया है। वहीं पोस्ट में कहा गया है कि 9 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्रालय का पोर्टल बंद हो चुका था, जिसके चलते नाम पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सके।(हालांकि इन तारीख और उनसे जुड़े दावों की पुष्टि खबरदेव नहीं करता)
इस पोस्ट पर अजित राठी ने सवाल उठाया कि जिस फाइल के अप्रूवल के लिए पर्याप्त समय था, उसकी मंजूरी में 27 दिन क्यों लगे। उन्होंने इस मामले में गृह विभाग के संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।अजित राठी ने अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोपों पर अभी तक गृह विभाग या शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।









